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खुबसूरत लडकियाँ ज्यादा पढ़ती नहीं हैं।
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वो जानती हैं कि दुनिया के किसी कोने में –
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कोई गधा, उनके लिए डॉक्टर या इंजीनियर बन रहा होगा

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A CONSTRUCTION MAN

सन् 2095 यानी की आज से 79 साल बाद।
रितेश अपने कमरे में चुपचाप गुमसुम सा बैठा है….तभी मम्मी की तरंगे कैच होने लगती है(उस समय तक शायद मोबाईल म्यूज़ियम में दिखेंगे और ऐसे छोटे छोटे ऊँगली में फिट होने वाले गजेट्स आजायेंगे जिनका बटन ऑन करने के बाद जिस व्यक्ति के बारे में सोचेंगे उस से मानसिक तरंगो से बात शुरू हो जाएगी जैसे आजकल मोबाईल से होती है।
रितेश हलो मम्मी …कैसी है आप???
मम्मी:–ठीक हूँ बेटा ..तू बता अभी अमेरिका में धूप निकली की नही??
रितेश:–नही मम्मी अभी कहाँ… करीब दो महीने तो हो ही गए…अभी तक अन्धेरा ही है और मौसम विभाग की भविष्यवाणी हुई है की अभी एक महीने और सूरज निकलने के आसार नही है।
मम्मी:–ह्म्म्म यहाँ भी स्थिति ठीक नही है ..पिछले एक महीने से सूरज ढल ही नही रहा…85 डिग्री सेल्सियस तापमान बना हुआ है…भयंकर पराबैंगनी किरणे फैली हुई है..कल ही पडौस वाले जोशी जी का मांस पिघल कर गिरने लगा था…वो अभी भी I.C.U में भर्ती है
रितेश :–ओह्ह तो क्या उन्हने घर पे ओजोन कवर नही लगा रखा है क्या???
मम्मी-घर पर लगवा तो रखा है पर उनकी कार का ओजोन कवर थोडा पुराना हो गया था इसलिए…उसमे छेद हो गया और पराबैगनी किरणे उनकी बॉडी से टच हो गई थी।
रितेश:–अच्छा मम्मी आपने सुना इधर एक बड़ी घटना हो गई…परसो अमेरिका के किसी कस्बे एक पौधा पाया गया…पूरी दुनिया में अफरातफरी मच गई दुनिया भर के वैज्ञानिक वहाँ इकठ्ठा हो गए काफी रिसर्च चल रही आखिर दुनिया में एक वनस्पति दिखाई देना बहुत बड़ी बात है।
मम्मी:—अच्छा बेटा तू टाईम से अपने भोजन के केप्सूल तो लेता हैं ना???और हां वो पानी वाले केप्सूल लेना मत भूलना वरना तेरी तबियत खराब हो जाएगी।
और टाईम से ऑक्सीजन लेते रहना बेटा तेरे पापा ने एक बार ऑक्सीजन लेने में लापरवाही कर दी थी पुरे फेफड़े ही बदलवाने पड़ गए…तू तो जानता ही है की अच्छे वाले फेफड़े कितने महंगे हो गए है…।
रितेश:—मम्मी अभी बजाज के फेफड़े लांच होने वाले है जो कीमत में काफी कम है और सर्विस होंडा के फेफड़ो जैसी ही रहेगी।
और हां मम्मी आप भी याद रखना घर में तीन चार लिवर एक्स्ट्रा रखा करो…..यूँ भी दादा जी को हर तीन महीने में नया लिवर लगता ही है एकाध एक्स्ट्रा में भी रहना चाहिए कब रात बी रात जरूरत पड़ जाए।
आपको शायद यह मजाक लग सकता है पर अपनी आने वाली पीढ़ी को इन परिस्थितियों से बचाना है तो ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाइये और अपने दोस्तों/रिश्तेदारो/कलीग्स को भी इसके लिए प्रेरित कीजिए।

A CONSTRUCTION MAN

आदरणीय गण को मेरा सादर प्रणाम।
आइये इस कहानी के माध्यम से हम जीवन के सारांश को समझने का प्रयत्न करते है….
एक गिलहरी रोज अपने काम पर समय
से आती थी और अपना काम पूर्ण मेहनत
तथा ईमानदारी से करती थी !
गिलहरी जरुरत से ज्यादा काम कर के
भी खूब खुश थी क्यों कि उसके मालिक …….
जंगल के राजा शेर नें उसे दस बोरी अखरोट
देने का वादा कर रक्खा था !
गिलहरी काम करते करते थक जाती थी
तो सोचती थी कि थोड़ा आराम कर लूँ ….
वैसे ही उसे याद आता था :- कि शेर उसे
दस बोरी अखरोट देगा – गिलहरी फिर
काम पर लग जाती !
गिलहरी जब दूसरे गिलहरियों को खेलते –
कुदते देखती थी तो उसकी भी ईच्छा होती
थी कि मैं भी enjoy करूँ !
पर उसे अखरोट याद आ जाता था !
और वो फिर काम पर लग जाती !
शेर कभी – कभी उसे दूसरे शेर के पास
भी काम करने के लिये भेज देता था !
ऐसा नहीं कि शेर उसे अखरोट नहीं देना
चाहता था , शेर बहुत ईमानदार था !
ऐसे ही समय बीतता रहा….
एक दिन ऐसा भी आया जब जंगल के
राजा शेर ने गिलहरी को दस बोरी अखरोट
दे कर आजाद कर दिया !
गिलहरी अखरोट के पास बैठ कर सोचने
लगी कि:-अब अखरोट हमारे किस काम के ?
पुरी जिन्दगी काम करते – करते दाँत तो घिस
गये, इसे खाऊँगी कैसे !
यह कहानी आज जीवन की हकीकत
बन चुकी है !
इन्सान अपनी ईच्छाओं का त्याग करता है,
और पूरी जिन्दगी नौकरी में ,business में, धन कमाने में बिता देता है !
60 वर्ष की उम्र में जब वो रिटायर्ड होता है
तो उसे उसका जो फन्ड मिलता है !या bank balance होता है
उसे use करने की क्षमता खो चुका होता है
तब तक जनरेशन बदल चुकी होती है,
परिवार को चलाने वाले बच्चे आ जाते है।
क्या नये मुखिया को इस बात का अन्दाजा लग पायेगा की इस फन्ड के लिये : –
कितनी इच्छायें मरी होगी ?
कितनी तकलीफें मिली होगी ?
कितनें सपनें रहे होंगे ?
– – – – – – – – – – – – – – – – – – – –
क्या फायदा ऐसे फन्ड का जिसे
पाने के लिये पूरी जिन्दगी लगाई जाये
और उसका इस्तेमाल खुद न कर सके !
“इस धरती पर कोई ऐसा अमीर अभी
तक पैदा नहीं हुआ जो बीते हुए समय
को खरीद सके ।

A CONSTRUCTION MAN

एक पान वाला था। जब भी पान खाने जाओ ऐसा लगता कि वह हमारा ही रास्ता देख रहा हो।
हर विषय पर बात करने में उसे बड़ा मज़ा आता। कई बार उसे कहा की भाई देर हो जाती है जल्दी पान लगा दिया करो पर उसकी बात ख़त्म ही नही होती।
एक दिन अचानक कर्म और भाग्य पर बात शुरू हो गई।
तक़दीर और तदबीर की बात सुन मैनें सोचा कि चलो आज उसकी फ़िलासफ़ी देख ही लेते हैं।
मैंने एक सवाल उछाल दिया।
मेरा सवाल था कि आदमी मेहनत से आगे बढ़ता है या भाग्य से?
और उसके जवाब से मेरे दिमाग़ के सारे जाले ही साफ़ हो गए।
कहने लगा,आपका किसी बैंक में लाकर तो होगा?
उसकी चाभियाँ ही इस सवाल का जवाब है। हर लाकर की दो चाभियाँ होती हैं।
एक आप के पास होती है और एक मैनेजर के पास।
आप के पास जो चाभी है वह है परिश्रम और मैनेजर के पास वाली भाग्य।
जब तक दोनों नहीं लगतीं ताला नही खुल सकता।
आप कर्मयोगी पुरुष हैं ओर मैनेजर भगवान।
अाप को अपनी चाभी भी लगाते रहना चाहिये। पता नहीं ऊपर वाला कब अपनी चाभी लगा दे।
कहीं ऐसा न हो की भगवान अपनी भाग्यवाली चाभी लगा रहा हो और हम परिश्रम वाली चाभी न लगा पायें और ताला खुलने से रह जाये ।
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